
गबन
by मुंशी प्रेमचंद
About this Book
गबन उपन्यास मुंशी प्रेमचंद की अमर और अत्यंत लोकप्रिय सामाजिक रचनाओं में से एक है। यह उपन्यास भारतीय मध्यमवर्गीय समाज में फैले दिखावे, झूठी शान और स्त्रियों के आभूषण-प्रेम की घातक प्रवृत्ति को सजीव रूप से उजागर करता है। कहानी के मुख्य पात्र रमानाथ का जीवन आर्थिक तंगी के बावजूद समाज में रईस दिखने के झूठे आडंबरों में फंस जाता है। अपनी नवविवाहिता पत्नी जालपा की चंद्रहार की लालसा पूरी करने के लिए वह लगातार कर्ज के भंवर में डूबता चला जाता है। झूठी प्रतिष्ठा बनाए रखने का यह दबाव रमानाथ को एक दिन दफ्तर में सरकारी गबन जैसा गंभीर अपराध करने पर विवश कर देता है। अपराधबोध और गिरफ्तारी के भय से त्रस्त रमानाथ घर-बार छोड़कर प्रयाग से कलकत्ता भागने को मजबूर हो जाता है। उपन्यास के दूसरे चरण में जालपा का अप्रत्याशित आत्मिक रूपांतरण देखने को मिलता है, जो अपने आभूषण बेचकर प्रायश्चित करती है। प्रेमचंद ने कलकत्ता के स्वतंत्रता आंदोलन, पुलिसिया तंत्र के छल-कपट और न्याय व्यवस्था के खोखलेपन को बड़ी निपुणता से उकेरा है। यह रचना केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक कमजोरियों का एक आईना प्रस्तुत करती है। अंतिम अध्याय तक आते-आते यह उपन्यास मानव चरित्र के सुधार, आत्मत्याग और जीवन के सच्चे नैतिक मूल्यों की स्थापना करता है।