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निर्मला
Published1927
Pages220
LanguageHindi

निर्मला

by मुंशी प्रेमचंद

About this Book

निर्मला उपन्यास मुंशी प्रेमचंद का एक अत्यंत मर्मस्पर्शी, विचारोत्तेजक और कालजयी सामाजिक उपन्यास है। इस उपन्यास में भारतीय समाज की दो भीषण कुरीतियों—दहेज प्रथा और अनमेल विवाह—के दुष्प्रभावों का हृदयद्रावक चित्रण किया गया है। निर्मला एक सुंदर, सुशिक्षित और सुशील युवती है, जिसका विवाह दहेज न दे पाने के कारण एक अधेड़ वकील तोताराम से कर दिया जाता है। तोताराम की उम्र निर्मला से बहुत अधिक होती है और उसके पहले से ही तीन वयस्क पुत्र होते हैं, जिससे घर में कलह का बीजारोपण होता है। निर्मला अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम और सम्मान पाने के बजाय संदेह, मानसिक प्रताड़ना और कलंक का शिकार बनती है। तोताराम का अपने ही ज्येष्ठ पुत्र मंसाराम पर झूठा संदेह परिवार को धीरे-धीरे विनाश के कगार पर धकेल देता है। एक-एक करके तोताराम के तीनों पुत्र काल के गाल में समा जाते हैं और तोताराम पश्चाताप की अग्नि में जलता हुआ घर छोड़ देता है। निर्मला अपनी नवजात बच्ची के साथ घोर विपन्नता, सामाजिक लांछन और एकाकीपन से जूझते हुए तिल-तिल कर दम तोड़ देती है। प्रेमचंद ने तत्कालीन भारतीय समाज में नारी की असहाय स्थिति, परतंत्रता और विवशता को अत्यंत मार्मिक भाषा में व्यक्त किया है। यह उपन्यास आज भी समाज को नारी अस्मिता, विवाह के नैतिक आधार और रूढ़िवादी कुप्रथाओं के विरुद्ध सोचने पर विवश करता है।

निर्मला by मुंशी प्रेमचंद | Anchor Library