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सेवासदन
Published1919
Pages340
LanguageHindi

सेवासदन

by मुंशी प्रेमचंद

About this Book

सेवासदन उपन्यास मुंशी प्रेमचंद के साहित्यिक जीवन का वह ऐतिहासिक पड़ाव है जिसने हिंदी उपन्यास को यथार्थवाद की नई दिशा दी। यह उपन्यास मूलतः नारी जीवन की विवशताओं, वैवाहिक उपेक्षा, वेश्यावृत्ति की सामाजिक समस्या और धार्मिक पाखंड पर केंद्रित है। मुख्य नायिका सुमन एक आत्मसम्मान से भरी युवती है, जिसका विवाह दहेज के अभाव में एक कंजूस और शक्की दारोगा गजाधर से होता है। घर में प्रेम, आर्थिक स्वतंत्रता और बुनियादी सम्मान न मिलने के कारण सुमन का दांपत्य जीवन निरंतर कलह का अखाड़ा बन जाता है। पति द्वारा घर से निकाले जाने के बाद समाज उसे कोई सम्मानजनक शरण नहीं देता, और वह परिस्थितियों के दबाव में दालमंडी की ओर खिंचती है। प्रेमचंद ने दिखाया है कि कैसे समाज की संकीर्ण मानसिकता और पुरुषवादी अहंकार स्त्रियों को पतन के रास्ते पर धकेलने के लिए उत्तरदायी है। उपन्यास में पद्मसिंह और विट्ठलदास जैसे चरित्रों के माध्यम से समाज सुधार और वेश्याओं के पुनर्वास की गंभीर बहस खड़ी की गई है। सुमन अपने आत्मबल और पश्चाताप के बल पर अंततः समाज सेवा का कठिन मार्ग चुनती है और अनाथ बालिकाओं के लिए 'सेवासदन' की नींव रखती है। यह रचना रूढ़िवादी सामाजिक मर्यादाओं के पाखंड को बेनकाब करती है और नारी को स्वावलंबन का प्रेरक संदेश देती है। प्रेमचंद की सशक्त लेखनी ने इस उपन्यास को भारतीय समाज-सुधार आंदोलन का एक अमर दस्तावेज बना दिया है।