
वरदान
by मुंशी प्रेमचंद
About this Book
वरदान उपन्यास मुंशी प्रेमचंद द्वारा रचित एक अत्यंत भावपूर्ण, आदर्शवादी और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रचना है। यह उपन्यास बनारस की पृष्ठभूमि में रचा गया है, जहाँ व्यक्तिगत प्रेम और राष्ट्र-प्रेम के बीच एक सुंदर अंतर्संबंध स्थापित होता है। कहानी के मुख्य पात्र प्रतापचंद्र और ब्रजरानी बचपन से एक-दूसरे के गहरे मित्र होते हैं और मन ही मन एक-दूसरे को चाहते हैं। किंतु सामाजिक रूढ़ियों और पारिवारिक मर्यादाओं के कारण ब्रजरानी का विवाह एक धनी परिवार में कर दिया जाता है। विवाह के उपरांत भी दोनों का प्रेम वासना से परे, एक अत्यंत पवित्र, उदात्त और आध्यात्मिक ऊंचाई को प्राप्त करता है। प्रतापचंद्र अपने व्यक्तिगत विरह और दुख को संकीर्ण रखने के बजाय उसे देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित कर देता है। वह स्वामी बालाजी के रूप में संन्यास लेकर मातृभूमि के स्वाधीनता आंदोलन और गरीबों की भलाई में अपना जीवन लगा देता है। ब्रजरानी भी अपनी कविताओं और आदर्श जीवन के माध्यम से देशवासियों में राष्ट्रीय चेतना और आत्मगौरव की अलख जगाती है। प्रेमचंद ने इस रचना में दिखाया है कि स्वार्थपूर्ण प्रेम से कहीं महान वह प्रेम है जो राष्ट्र-कल्याण के लिए वरदान बन जाए। त्याग, संयम और मातृभूमि के प्रति समर्पण की यह अमर गाथा हिंदी साहित्य की एक अनमोल धरोहर है।