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चंद्रकांता
Published1888
Pages380
LanguageHindi

चंद्रकांता

by देवकीनंदन खत्री

About this Book

चंद्रकांता उपन्यासकार बाबू देवकीनंदन खत्री द्वारा रचित हिंदी का पहला और सबसे लोकप्रिय तिलिस्मी-ऐयारी उपन्यास है। इस उपन्यास की लोकप्रियता का आलम यह था कि उस दौर में लाखों लोगों ने केवल इसे पढ़ने के लिए हिंदी भाषा सीखी थी। कथा विजयगढ़ की अत्यंत रूपवती राजकुमारी चंद्रकांता और नौगढ़ के वीर राजकुमार वीरेंद्र सिंह के रोमांचक प्रेम पर आधारित है। दोनों राज्यों के बीच की राजनीतिक रंजिश और क्रूर दीवान बद्रीनाथ का षड्यंत्र कहानी को रहस्य के चरम पर ले जाता है। उपन्यास में 'ऐयारों' की अद्भुत दुनिया पेश की गई है, जिनमें तेजसिंह, देवीसिंह और चपला जैसे पात्र रूप बदलने में माहिर हैं। तिलिस्मी खजाने, भूमिगत भूलभुलैया, गुप्त सुरंगें और जादुई तिलिस्म पाठक की उत्सुकता को पल भर के लिए भी कम नहीं होने देते। खत्री जी की कल्पनाशीलता इतनी समृद्ध है कि वह पाठक को एक जादुई, अविश्वसनीय और सम्मोहक लोक में ले जाकर खड़ा कर देती है। उपन्यास में प्रेम, वीरता, कूटनीति, वफादारी और विश्वासघात के अनेक रोमांचक मोड़ लगातार आते रहते हैं। यह रचना हिंदी गद्य साहित्य के विकास में एक मील का पत्थर है जिसने आम जनता में उपन्यास पढ़ने का अभूतपूर्व चस्का लगाया। आज भी चंद्रकांता का तिलिस्मी सम्मोहन और ऐयारों की जादुई चालाकियाँ हर पीढ़ी के पाठक को रोमांचित कर देती हैं।