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गुनाहों का देवता
Published1949
Pages280
LanguageHindi

गुनाहों का देवता

by धर्मवीर भारती

About this Book

गुनाहों का देवता आधुनिक हिंदी साहित्य का सबसे लोकप्रिय, सबसे भावुक और सर्वाधिक पढ़ा जाने वाला प्रेम-उपन्यास है। डॉ. धर्मवीर भारती द्वारा रचित यह उपन्यास इलाहाबाद (प्रयागराज) की बौद्धिक और रोमांटिक पृष्ठभूमि में बुना गया है। कहानी के मुख्य पात्र चंदर और सुधा का प्रेम शारीरिक आकर्षण से कोसों दूर, एक अत्यंत पवित्र, अलौकिक और आत्मिक स्तर पर स्थित है। चंदर अपने गुरु डॉ. शुक्ल के प्रति अगाध श्रद्धा और कृतज्ञता के कारण सुधा को किसी अन्य व्यक्ति से विवाह करने के लिए मनाता है। सुधा अपने हृदयेश्वर चंदर की आज्ञा मानकर विवाह तो कर लेती है, किंतु उसका अंतर्मन इस आघात को कभी सहन नहीं कर पाता। उपन्यास में विनती और पम्मी जैसे चरित्र चंदर के जीवन में आकर प्रेम, वासना, नैतिकता और अपराधबोध का नया द्वंद्व रचते हैं। सुधा का धीरे-धीरे वियोग में घुलकर मृत्यु की ओर बढ़ना पाठक के हृदय को अश्रुपूरित और शोकमग्न कर देता है। भारती जी की काव्यात्मक भाषा, दार्शनिक चिंतन और पात्रों का सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक विश्लेषण इस उपन्यास को अमर बना देता है। यह उपन्यास प्रेम की उस उदात्त और दुखद पराकाष्ठा को छूता है जहाँ देवता बनना भी कभी-कभी सबसे बड़ा गुनाह सिद्ध होता है। हिंदी के हर युवा और संवेदनशील पाठक के लिए यह उपन्यास जीवन की एक अनिवार्य, अविस्मरणीय और अमिट अनुभूति है।