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कामायनी
Published1936
Pages290
LanguageHindi

कामायनी

by जयशंकर प्रसाद

About this Book

कामायनी छायावादी युग के प्रवर्तक महाकवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित हिंदी का सर्वश्रेष्ठ और अमर महाकाव्य है। यह महाकाव्य जल-प्रलय की पौराणिक कथा पर आधारित है, जिसमें संपूर्ण सृष्टि के विनाश के बाद एक नए युग की शुरुआत होती है। इसके तीन प्रमुख पात्र—मनु (मन का प्रतीक), श्रद्धा (हृदय व आस्था की प्रतीक) और इड़ा (तर्क व बुद्धि की प्रतीक)—मानव चेतना को दर्शाते हैं। प्रलय के उपरांत एकाकी और अवसादग्रस्त मनु को श्रद्धा अपने अगाध प्रेम और कर्म-प्रेरणा से पुनः जीवन की ओर उन्मुख करती है। किंतु मनु का चंचल मन आगे चलकर बुद्धि-प्रधान इड़ा के सारस्वत प्रदेश में जाकर भौतिक विकास और सत्ता के अहंकार में उलझ जाता है। इड़ा के नियमों और भौतिकवादी सभ्यता के संघर्ष में मनु पुनः पराजित और विक्षिप्त होकर शांति की खोज में निकल पड़ते हैं। श्रद्धा पुनः आकर मनु का मार्गदर्शन करती है और उन्हें ज्ञान, इच्छा और क्रिया के सुंदर समन्वय से 'अखंड आनंद' तक पहुंचाती है। 15 सर्गों में विभक्त यह महाकाव्य चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, लज्जा, कर्म, ईर्ष्या, इड़ा और आनंद जैसे मानवीय मनोभावों का अद्भुत दर्पण है। प्रसाद जी की प्रौढ़, संस्कृतनिष्ठ और नादमयी भाषा शैली इस ग्रंथ को विश्व-साहित्य के सर्वोच्च शिखरों पर स्थापित करती है। कामायनी आधुनिक मानव को तर्क और आस्था, विज्ञान और अध्यात्म के बीच संतुलन साधकर आनंदमय जीवन जीने का अमर संदेश देती है।