← Back to Library
स्कंदगुप्त
Published1928
Pages210
LanguageHindi

स्कंदगुप्त

by जयशंकर प्रसाद

About this Book

स्कंदगुप्त जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित ऐतिहासिक नाटकों में सर्वश्रेष्ठ, अत्यंत गंभीर और राष्ट्रप्रेम से परिपूर्ण महानाटक है। इस नाटक की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि गुप्त साम्राज्य के पराक्रमी सम्राट स्कंदगुप्त विक्रमादित्य के शौर्य और बलिदान पर आधारित है। भारत भूमि पर बर्बर हूणों के भीषण आक्रमण और राजदरबार के भीतर चल रहे कुचक्रों व षड्यंत्रों का इसमें रोमांचक संघर्ष है। युवराज स्कंदगुप्त आंतरिक गृहकलह और बाह्य आक्रांताओं दोनों से एक साथ लोहा लेते हुए साम्राज्य की रक्षा का बीड़ा उठाते हैं। नाटक में देवसेना का चरित्र भारतीय नारी के त्याग, आत्मसम्मान और अमर बलिदान की सबसे उज्ज्वल और अविस्मरणीय मिसाल है। देवसेना का प्रसिद्ध गीत 'आह! वेदना मिली विदाई' हिंदी साहित्य की सबसे मार्मिक और करुणापूर्ण काव्य-रचनाओं में गिना जाता है। स्कंदगुप्त जीवन भर युद्धों, संघर्षों और राष्ट्र-रक्षा में जूझते हुए व्यक्तिगत सुख, सिंहासन और प्रेम का पूर्ण परित्याग कर देते हैं। प्रसाद जी ने इस नाटक के माध्यम से गुलाम भारत के नवयुवकों में सोए हुए राष्ट्रीय गौरव और शौर्य को जगाने का प्रयास किया था। गंभीर दार्शनिक संवाद, ऐतिहासिक प्रामाणिकता और उच्च कोटि की काव्यात्मकता इस नाटक को रंगमंच और साहित्य दोनों का सिरमौर बनाती है। राष्ट्र के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले नायक की यह वीरगाथा प्रत्येक देशवासी के मन में देशभक्ति का संचार करती है।