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चंद्रगुप्त
Published1931
Pages230
LanguageHindi

चंद्रगुप्त

by जयशंकर प्रसाद

About this Book

चंद्रगुप्त महाकवि और नाटककार जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित एक अत्यंत भव्य, ओजस्वी और ऐतिहासिक महानाटक है। यह नाटक भारत के प्राचीन इतिहास के उस स्वर्णिम कालखंड पर आधारित है जब सिकंदर के विश्व-विजयी रथ को भारत भूमि पर रोका गया था। नाटक के केंद्र में कूटनीति के महान ज्ञाता आचार्य चाणक्य और उनके योग्य व पराक्रमी शिष्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य हैं। मगध के विलासी और अन्यायी नंद वंश का पतन करके एक सशक्त, संगठित और अखंड भारत का निर्माण करना चाणक्य का परम लक्ष्य होता है। नाटक में कार्नेलिया का अमर राष्ट्रगीत 'अरुण यह मधुमय देश हमारा' भारत की प्राकृतिक सुषमा और वैश्विक बंधुत्व का अमर गान प्रस्तुत करता है। कल्याणी, मालविका, सुवासिनी और सिंहरण जैसे तेजस्वी पात्र नाटक के कथानक को वीरता और राष्ट्रभक्ति के चरम पर पहुंचाते हैं। प्रसाद जी ने चाणक्य की राजनीतिक सूझबूझ और चंद्रगुप्त के शौर्य के माध्यम से सिद्ध किया कि त्याग के बिना अखंड राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं। भारतीय वीरों की स्वाधीनता-प्रियता और विदेशी आक्रांताओं के मान-मर्दन का यह सजीव और रोमांचक चित्रण है। नाटक की भाषा संस्कृतनिष्ठ, ओजपूर्ण और संवाद अत्यंत तीक्ष्ण, बौद्धिक व देशभक्ति के जज्बे से भरपूर हैं। यह अमर नाटक आज भी प्रत्येक भारतीय को अपने देश की संप्रभुता, एकता और सांस्कृतिक वैभव पर गर्व करना सिखाता है।